तुलसी पूजन दिवस: अपनी संस्कृति को भूलते हम, सोशल मीडिया पर विदेशी परंपराओं की बढ़ती छाया पर मैथिली अभिनेता विक्रम मिश्रा की चिंता
Tatka Gapp Desk | Special Article
आज का दौर डिजिटल है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर हर दिन नई-नई ट्रेंडिंग पोस्ट देखने को मिलती हैं। लेकिन इसी भीड़ में कहीं न कहीं हम अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। इसी विषय पर मैथिली सिनेमा के चर्चित अभिनेता विक्रम मिश्रा ने तुलसी पूजन दिवस को लेकर एक भावुक और सोचने पर मजबूर कर देने वाली बात कही है।
विक्रम मिश्रा का कहना है कि 25 दिसंबर को हमें सिर्फ “मेरी क्रिसमस” कहने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसी दिन तुलसी पूजन दिवस भी पूरे श्रद्धा भाव से मनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल वे देख रहे हैं कि लोग फेसबुक पर तुलसी पूजन की तस्वीर या विश पोस्ट करने से ज्यादा, बिना पूरी जानकारी के विदेशी त्योहारों की शुभकामनाएं देने में व्यस्त रहते हैं।
अपनी संस्कृति को भूलते हम?
विक्रम मिश्रा कहते हैं,
“आज हम यह देख रहे हैं कि लोग अपनी सनातन परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। हम बिना यह जाने कि किसी त्योहार का असली अर्थ क्या है, सिर्फ ट्रेंड के कारण पोस्ट और विश करने लगते हैं। यह हमारी पहचान के लिए सही नहीं है।”
उनका मानना है कि आस्था दिखावे से नहीं, समझ और श्रद्धा से आती है। अगर हम अपने धर्म, अपने संस्कार और अपनी संस्कृति को ही भूल जाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी को हम क्या सिखाएंगे?
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तुलसी पूजन दिवस क्यों मनाया जाता है?
तुलसी पूजन दिवस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।
तुलसी पूजन का धार्मिक महत्व:
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तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं
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तुलसी बिना पूजा के कई धार्मिक कर्म अधूरे माने जाते हैं
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तुलसी घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है
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रोग-नाशक और आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में तुलसी की नियमित पूजा होती है, वहां दरिद्रता, नकारात्मकता और रोग प्रवेश नहीं करते।
25 दिसंबर को ही तुलसी पूजन क्यों?
बहुत कम लोग जानते हैं कि 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस इसलिए मनाया जाता है, ताकि लोग इस दिन अपनी संस्कृति और सनातन परंपरा की ओर ध्यान दें। यह दिन एक सांस्कृतिक चेतना दिवस के रूप में भी देखा जाता है।
इसका उद्देश्य किसी अन्य धर्म या पर्व का विरोध नहीं, बल्कि अपनी परंपरा को याद रखना और सम्मान देना है।
Tatka Gapp के Citizen Reporterभारतीय संस्कृति”
सोशल मीडिया और हमारी सोच
आज सोशल मीडिया पर ट्रेंड तय करता है कि हम क्या सोचेंगे और क्या पोस्ट करेंगे। विक्रम मिश्रा इसी पर सवाल उठाते हैं।
उनका कहना है कि:
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हम तुलसी पूजन की फोटो डालने में संकोच करते हैं
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लेकिन विदेशी त्योहारों की विश बिना सोचे समझे कर देते हैं
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हम अपनी शक्ति (संस्कृति) को भूलते जा रहे हैं
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और दूसरों की परंपराओं पर आंख बंद कर भरोसा कर लेते हैं
यह कोई गलत बात नहीं कि हम सभी धर्मों का सम्मान करें, लेकिन अपनी पहचान को मिटाकर नहीं।
कौन हैं विक्रम मिश्रा? (Maithili Actor Vikram Mishra)
विक्रम मिश्रा मैथिली सिनेमा और संगीत जगत का जाना-माना नाम हैं। वे अपने अभिनय के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए भी पहचाने जाते हैं।
विक्रम मिश्रा की पहचान:
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मैथिली अभिनेता
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लोक संस्कृति के समर्थक
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सामाजिक विषयों पर मुखर आवाज
वे अक्सर अपने इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मैथिली भाषा, संस्कृति और परंपरा को बचाने की बात करते हैं।
विक्रम मिश्रा के हिट गीत और काम
विक्रम मिश्रा ने कई मैथिली गीतों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है, जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। उनके गानों में:
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मिट्टी की खुशबू
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लोक संस्कृति की झलक
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सामाजिक संदेश
स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है।
उनका काम सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ाव भी सिखाता है।
तुलसी पूजन: सिर्फ पूजा नहीं, जीवनशैली
तुलसी पूजन केवल एक धार्मिक कर्म नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक है।
वैज्ञानिक कारण:
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तुलसी हवा को शुद्ध करती है
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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है
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मानसिक शांति प्रदान करती है
यही कारण है कि हमारे पूर्वजों ने हर घर में तुलसी लगाने की परंपरा बनाई।
आज की पीढ़ी को क्या समझना चाहिए?
आज जरूरत है कि:
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हम अपनी संस्कृति को जानें
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अपनी परंपराओं पर गर्व करें
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बच्चों को तुलसी पूजन का महत्व बताएं
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सोशल मीडिया पर संतुलन बनाए रखें
हर धर्म का सम्मान जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों को मजबूत रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
निष्कर्ष
तुलसी पूजन दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार और हमारी आस्था ही हमारी असली पहचान है। मैथिली अभिनेता विक्रम मिश्रा की यह अपील केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक चेतावनी और एक संदेश है।
अगर हम आज अपनी परंपराओं को भूल गए, तो कल हमारी पहचान खो सकती है।
इसलिए आइए, 25 दिसंबर को तुलसी पूजन करें, अपनी संस्कृति को समझें और आने वाली पीढ़ी को भी इससे जोड़ें।


