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मैथिली को मिले उसका अधिकार, शिक्षा संस्थानों में अनिवार्य हो पढ़ाई: सांसद

 मैथिली भाषा को उसका संवैधानिक और सामाजिक अधिकार दिलाने की दिशा में एक बार फिर मजबूत आवाज उठी है। सांसद ने कहा कि मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान है और इसे शिक्षा संस्थानों में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें।

यह बात उन्होंने शेखर क्लासेज के 26वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर कही। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों की उपस्थिति रही।

शिक्षा से ही बचेगी भाषा और संस्कृति

सांसद ने कहा कि मैथिली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिलने के बावजूद अब तक इसे वह सम्मान और स्थान नहीं मिल पाया है, जिसकी वह हकदार है। यदि प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक मैथिली को पढ़ाया जाए, तो छात्र न केवल अपनी भाषा में दक्ष होंगे, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा से छात्रों की समझ, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

शेखर क्लासेज की भूमिका की सराहना

कार्यक्रम के दौरान सांसद ने शेखर क्लासेज द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा रहा है, बल्कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।

छात्रों को दिया प्रेरक संदेश

अपने संबोधन में सांसद ने छात्रों से मेहनत, अनुशासन और निरंतर अध्ययन को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही ऐसा माध्यम है, जो समाज को आगे ले जा सकता है और युवाओं को आत्मनिर्भर बना सकता है।

समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी

सांसद ने जोर देकर कहा कि मैथिली भाषा और मिथिला संस्कृति के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज, शिक्षण संस्थानों और बुद्धिजीवियों की भी है। जब तक सामूहिक प्रयास नहीं होंगे, तब तक भाषा को उसका वास्तविक स्थान नहीं मिल पाएगा।

निष्कर्ष

शेखर क्लासेज के स्थापना दिवस पर उठी यह मांग न केवल मैथिली भाषा के भविष्य से जुड़ी है, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और समावेशी शिक्षा नीति की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।
मैथिली को शिक्षा का माध्यम बनाकर ही मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित और सशक्त किया जा सकता है।

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