चोरौत स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की मनमानी, मरीजों के साथ बेजुबानी – डबल इंजन सरकार की लापरवाही उजागर
सीतामढ़ी, बिहार: चोरौत स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की मनमानी और मरीजों के प्रति गंभीर लापरवाही ने स्थानीय जनता में नाराजगी फैला दी है। टटका गप्प की टीम ने जब अस्पताल की जांच पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच के दौरान खुलासा
जब टीम चोरौत स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, तो अस्पताल स्टाफ के अंदर बदतमीजी देखने को मिली। एक मरीज इलाज के लिए अस्पताल गया, जहाँ डॉक्टर ने उसे 1st फ्लोर पर खून की जांच करवाने को कहा। लेकिन जब मरीज वहां पहुंचा, तो ताला लगा हुआ था और स्टाफ या गार्ड का कोई पता नहीं था।
मीडिया टीम का अनुभव
जाँच के दौरान मीडिया के स्थानीय प्रतिनिधि — विक्रम मिश्रा, शुभम मिश्रा, कन्हैया झा, मुरारी पाठक, बबलू ठाकुर, कमलेश साह और राकेश साह — मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि सुबह लगभग 11 बजकर 12 मिनट पर भी स्टाफ मौजूद नहीं था और अस्पताल की स्थिति गंभीर रूप से लापरवाह थी।
स्टाफ का बचाव
तभी स्टाफ मौके पर आया। जब उनसे सवाल किया गया कि आप इतने देर से क्यों आए, तो उन्होंने जवाब दिया कि “हम मुजफरपुर से आते हैं, इसलिए देरी हो गई। मैं अकेला ऐसा नहीं हूँ, इस अस्पताल में कई स्टाफ देर से आते हैं।”
विवादास्पद प्रतिक्रिया
जब स्टाफ से पूछा गया कि “सरकार की तनख्वाह लेने के बाद भी लोग क्यों परेशान होते हैं?” तो उन्होंने “तू… तू… मैं… मैं…” जैसी बेजुबानी की प्रतिक्रिया दी। इसके बाद टीम ने प्रभारी विभूति भूषण से संपर्क किया, जिन्होंने कहा कि “हम इसकी जांच करेंगे।”
निष्कर्ष
चोरौत स्वास्थ्य केंद्र में यह पूरी घटना स्पष्ट रूप से डबल इंजन सरकार की लापरवाही और स्टाफ की गैरजिम्मेदारी को उजागर करती है। मरीजों को इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध कराना प्राथमिक दायित्व होना चाहिए, लेकिन अस्पताल स्टाफ की मनमानी और अनियंत्रित व्यवहार के कारण जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

