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बिहार सरस मेला : जीविका दीदियों के स्वदेशी उत्पादों की धूम, 78 हजार से अधिक आगंतुक

ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में आयोजित बिहार सरस मेला – 2025 ने इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। मेले में जीविका दीदियों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुएँ और स्वदेशी उत्पादों की बिक्री जोरों पर रही, वहीं 78,000 से अधिक आगंतुकों की सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

हस्तशिल्प और लोकसंस्कृति का भव्य संगम

बिहार सरस मेला 2025 में सदियों पुरानी शिल्पकला, लोकसंस्कृति, पारंपरिक परंपराएँ और स्वादिष्ट देसी व्यंजन लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। मेले में मिट्टी, बांस, कपड़ा, पेंटिंग, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएँ और घरेलू उपयोग के स्वदेशी उत्पादों को लोगों ने खूब सराहा।

₹1 करोड़ 33 लाख से अधिक की खरीद-बिक्री

आयोजन के छठे दिन तक ही मेले में ₹1 करोड़ 33 लाख से अधिक की खरीद-बिक्री दर्ज की गई, जो ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर पेश करती है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जीविका दीदियों के उत्पादों पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है

78,000 से अधिक आगंतुकों की सहभागिता

मेले में बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी लोग पहुंचे। 78,000 से अधिक आगंतुकों की उपस्थिति ने बिहार सरस मेला 2025 को जनभागीदारी के लिहाज से बेहद सफल आयोजन बना दिया।

जीविका दीदियाँ बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

मेले में भाग ले रहीं जीविका दीदियाँ न केवल अपने उत्पाद बेच रही हैं, बल्कि स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश कर रही हैं। यह मेला ग्रामीण महिलाओं को बाजार, पहचान और आय का स्थायी साधन उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहा है।

ग्रामीण विकास की दिशा में मजबूत कदम

बिहार सरस मेला 2025 यह साबित करता है कि सही मंच और अवसर मिलने पर ग्रामीण शिल्प, स्थानीय उत्पाद और महिला उद्यमिता आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन सकते हैं। यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक प्रभावी पहल है।


✍️ निष्कर्ष

बिहार सरस मेला – 2025 केवल एक मेला नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की प्रतिभा, जीविका दीदियों की मेहनत और आत्मनिर्भर बिहार की सोच का जीवंत उदाहरण है। बढ़ती बिक्री और भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पादों का भविष्य उज्ज्वल है।

बिहार न्यूज़ हिंदी में

2026 में बिहार में लॉन्च होगा ‘Chahatgar (चहटगर)’ ब्रांड, शुद्ध देसी मसाला, मक्खन और अचार से बदलेगा स्वाद का बाजार

बिहार में वर्ष 2026 में शुद्ध देसी और पारंपरिक स्वाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नया ब्रांड Chahatgar (चहटगर) लॉन्च होने जा रहा है। यह ब्रांड देसी मसाले, शुद्ध मक्खन और पारंपरिक अचार जैसे उत्पादों के साथ बाजार में उतरने की तैयारी में है।

खास बात यह है कि इस ब्रांड के ब्रांड एंबेसडर के रूप में जाने-माने नाम Vikram Mishra को चुना गया है, जिससे Chahatgar को युवाओं और आम उपभोक्ताओं के बीच मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।


शुद्ध देसी उत्पादों पर Chahatgar का फोकस

Chahatgar (चहटगर) ब्रांड का मुख्य उद्देश्य बिना मिलावट, शुद्ध देसी और पारंपरिक विधि से बने खाद्य उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुँचाना है। ब्रांड की ओर से जिन उत्पादों को लॉन्च किया जाएगा, उनमें शामिल हैं:

ब्रांड का दावा है कि सभी उत्पाद स्थानीय कच्चे माल और पारंपरिक रेसिपी के आधार पर तैयार किए जाएंगे।


2026 में बिहार से होगी शुरुआत

Chahatgar ब्रांड की शुरुआत बिहार से 2026 में की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे अन्य राज्यों तक ले जाने की योजना है। कंपनी का लक्ष्य है कि बिहार की पहचान को देसी स्वाद और गुणवत्ता के साथ राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाए।


ब्रांड एंबेसडर विक्रम मिश्रा की भूमिका

ब्रांड एंबेसडर विक्रम मिश्रा Chahatgar के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाएंगे। वे ब्रांड के मूल विचार —
“शुद्ध, देसी और भरोसेमंद स्वाद” — को जनता तक पहुँचाएंगे।

ब्रांड प्रबंधन का मानना है कि विक्रम मिश्रा की लोकप्रियता और विश्वसनीय छवि से Chahatgar को तेज़ पहचान और भरोसा मिलेगा।


स्थानीय किसानों और कारीगरों को मिलेगा लाभ

Chahatgar केवल एक फूड ब्रांड नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों और छोटे उत्पादकों को जोड़ने की पहल भी है।

इन सभी से बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


बाजार में क्यों खास होगा Chahatgar?


✍️ निष्कर्ष

Chahatgar (चहटगर) का 2026 में बिहार से लॉन्च होना देसी स्वाद, आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। शुद्ध मसाला, मक्खन और अचार के साथ यह ब्रांड उन लोगों को आकर्षित करेगा जो घर जैसा स्वाद और भरोसेमंद गुणवत्ता चाहते हैं।

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