एक साथ बन रहे तीन तूफान से बढ़ी चिंता: IMD ने चार राज्यों के लिए जारी किया भारी बारिश का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर पर एक बार फिर मौसम तेजी से करवट ले रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताज़ा अपडेट के अनुसार, आने वाले दिनों में समुद्री क्षेत्रों में तीन अलग-अलग मौसम प्रणालियाँ सक्रिय रहेंगी, जिनके कारण दक्षिण भारत और आसपास के राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का खतरा बढ़ गया है। बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया लो-प्रेशर एरिया, दक्षिण-पूर्व अरब सागर में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और कोमोरिन क्षेत्र के पास विकसित हो रहा एक और मौसम तंत्र, मिलकर मौसम को और अधिक अस्थिर कर सकते हैं। IMD ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए चार राज्यों—तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक—में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर एरिया बनना शुरू
बंगाल की खाड़ी में पिछले कुछ दिनों से बादलों की गतिविधि तेज हो रही थी। अब यह सिस्टम लो-प्रेशर एरिया बनने की दिशा में बढ़ रहा है और इसके 24–48 घंटों में और अधिक सक्रिय होने की संभावना है। IMD के अनुसार, यह सिस्टम जल्द ही डिप्रेशन का रूप ले सकता है, और यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं तो यह एक चक्रवाती तूफान के रूप में भी विकसित हो सकता है।
इस नए सिस्टम के प्रभाव से:
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आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में तेज हवाएँ और भारी बारिश
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ओडिशा और पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश
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समुद्र में ऊँची लहरों का खतरा बढ़ सकता है
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जा रही है।
दक्षिण-पूर्व अरब सागर में मौजूद साइक्लोनिक सर्कुलेशन बढ़ा रहा चिंता
दक्षिण-पूर्व अरब सागर में बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन पिछले दो दिनों से लगातार स्थिर बना हुआ है। सामान्यतः ऐसा तंत्र 24–36 घंटों में आगे बढ़ जाता है, लेकिन इसके ठहरा रहने से संकेत मिल रहे हैं कि यह सिस्टम अगले कुछ दिनों में एक लो-प्रेशर एरिया या गहरे डिप्रेशन में बदल सकता है।
इसका प्रभाव:
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केरल और दक्षिण कर्नाटक में भारी बारिश
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कुछ क्षेत्रों में अति भारी वर्षा की स्थिति
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पश्चिमी तट पर तेज हवाएँ और समुद्र में ऊँची तरंगें
केरल के तटीय जिलों में पहले से ही नदी-नालों में पानी बढ़ने की स्थिति है। IMD ने ग्रीन से येलो और येलो से ऑरेंज अलर्ट तक बढ़ाया है।
कोमोरिन क्षेत्र में भी नया चक्रवाती परिसंचरण
तीसरा मौसम तंत्र कोमोरिन क्षेत्र और उसके आसपास तेजी से सक्रिय हो रहा है। यहाँ ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसके 25 नवंबर के आसपास एक नई लो-प्रेशर प्रणाली में बदलने की पूरी संभावना है। यह सिस्टम श्रीलंका के पास से गुजरते हुए बाद में बंगाल की खाड़ी में और अधिक सक्रिय हो सकता है।
कोमोरिन क्षेत्र में बनने वाले सिस्टम अक्सर:
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दक्षिण तमिलनाडु
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दक्षिण केरल
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श्रीलंका के उत्तरी हिस्सों
में भारी वर्षा लेकर आते हैं। इस बार भी इसी तरह की स्थितियाँ बन रही हैं।
तीन सिस्टम एक साथ सक्रिय—मौसम में तेजी से बदलाव का खतरा
एक समय में एक-दो मौसम प्रणालियाँ सक्रिय होना सामान्य है, लेकिन तीन-तीन तंत्रों का एक साथ प्रबल होना मौसम में तेज बदलाव की आशंका को बढ़ा देता है। IMD के वैज्ञानिकों के अनुसार:
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समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है
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हवा की ऊपरी परतें अस्थिर हैं
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मॉनसून के बाद की यह अवधि आमतौर पर ऐसे सिस्टमों के लिए अनुकूल रहती है
इन्हीं कारणों से तीनों तंत्र तेजी से सक्रिय हो रहे हैं और परस्पर एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं।
इस संयुक्त प्रभाव से क्या होगा?
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तटीय क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश
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समुद्र में उफान और खतरनाक तरंगें
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कुछ जगहों पर तूफानी हवाओं की स्थिति
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निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा
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पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका
चार राज्यों में IMD का भारी बारिश का अलर्ट
IMD ने बताया कि इन तीन मौसम प्रणालियों का व्यापक असर दक्षिण भारत के चार राज्यों में साफ दिखाई देगा।
तमिलनाडु
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चेन्नई, रामनाथपुरम, नागपट्टिनम, तिरुनेलवेली में भारी बारिश
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स्थानीय बाढ़ की स्थिति बन सकती है
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समुद्र में मछुआरों के जाने पर पाबंदी
केरल
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एर्नाकुलम, कोट्टायम, तिरुवनंतपुरम में भारी से बहुत भारी बारिश
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नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने की संभावना
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पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा
आंध्र प्रदेश
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नेल्लोर, प्रकाशम और विशाखापत्तनम में मध्यम से भारी वर्षा
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तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएँ
कर्नाटक
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तटीय जिलों (उडुपी, दक्षिण कन्नड़) में भारी वर्षा
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समुद्र खतरनाक स्थिति में
स्थानीय प्रशासन हाई अलर्ट पर
इन हालात को देखते हुए संबंधित राज्यों में प्रशासन ने:
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एनडीआरएफ टीमों को तैयार रहने का निर्देश
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संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करने की योजना
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नदी तटों और तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ाई
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स्कूल-कॉलेज बंद करने पर विचार (कुछ जिलों में आदेश भी जारी)
मछुआरों के लिए चेतावनी
तीनों समुद्री क्षेत्रों—बंगाल की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और अरब सागर—में लहरों की ऊँचाई बढ़ने की संभावना है। इसलिए:
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अगले 4–5 दिन तक समुद्र में न जाने की सलाह
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तट के पास भी नावें सुरक्षित स्थान पर रखें
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मछली पकड़ने वाली गतिविधियों पर अस्थायी रोक
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 26 नवंबर से दो सिस्टमों के और तेज होने की संभावना है। यदि बंगाल की खाड़ी वाला सिस्टम चक्रवाती तूफान में बदलता है तो इसका असर और व्यापक हो सकता है।
हालाँकि, अंतिम स्थिति हवा की दिशा, समुद्री तापमान और सिस्टम की गति पर निर्भर करेगी।



