प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़ेंगे विधानसभा उपचुनाव, BJP के गढ़ में सीधी टक्कर; जानिए कौन हो सकता है भाजपा का उम्मीदवार

पटना | 5 जुलाई 2026
बिहार की राजनीति में आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जन सुराज पार्टी ने आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी है कि पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट से होने वाला उपचुनाव लड़ेंगे। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से यह उपचुनाव राज्य का सबसे चर्चित चुनाव बन गया है।
भाजपा के गढ़ में होगी सीधी लड़ाई
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले कई दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर लंबे समय तक भाजपा का कब्जा रहा है और नितिन नवीन लगातार यहां से विधायक चुने जाते रहे। ऐसे में प्रशांत किशोर का इसी सीट से चुनाव लड़ने का फैसला भाजपा के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
भाजपा से कौन हो सकता है उम्मीदवार?
भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा चल रही है। सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ भाजपा नेता नील रंजन घोष के नाम की हो रही है, जिन्हें नितिन नवीन का करीबी माना जाता है। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।
चुनाव कार्यक्रम
भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार—
- नामांकन शुरू : 6 जुलाई 2026
- नामांकन की अंतिम तिथि : 13 जुलाई 2026
- नामांकन पत्रों की जांच : 14 जुलाई 2026
- नाम वापसी की अंतिम तिथि : 16 जुलाई 2026
- मतदान : 30 जुलाई 2026
- मतगणना : 3 अगस्त 2026
विपक्ष की रणनीति पर भी नजर
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर विपक्षी दल भी अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने विपक्ष की ओर से एक साझा उम्मीदवार उतारने की बात कही है ताकि भाजपा के खिलाफ वोटों का बंटवारा न हो। वहीं महागठबंधन ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह उपचुनाव?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है। यदि प्रशांत किशोर यहां मजबूत प्रदर्शन करते हैं तो जन सुराज पार्टी को राज्य की राजनीति में नई पहचान मिल सकती है। वहीं भाजपा अपने सबसे मजबूत शहरी गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। इसलिए बांकीपुर का यह मुकाबला पूरे बिहार की नजरों में रहेगा।
राम मंदिर में 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस पर विवाद, पूर्व गृह सचिव ने उठाए सवाल; ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
राम मंदिर में 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस पर विवाद, पूर्व गृह सचिव ने उठाए सवाल; ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
अयोध्या | 5 जुलाई 2026
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित दान और प्रबंधन विवाद के बीच एक नया मामला सामने आया है। भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने दावा किया है कि उन्होंने अप्रैल 2024 में लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की सोने, चांदी और तांबे से निर्मित विशेष रामचरितमानस श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट की थी, लेकिन उन्हें आज तक इसकी आधिकारिक रसीद नहीं मिली।
क्या है पूरा मामला?
लक्ष्मी नारायण के अनुसार, यह विशेष रामचरितमानस उनकी दिवंगत मां की स्मृति और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी आस्था का प्रतीक थी। उनका कहना है कि दान के बाद इस रामचरितमानस को कुछ समय तक मंदिर परिसर में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन बाद में इसे वहां से हटा दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उन्होंने कई बार ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों से इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
कई अधिकारियों को लिखा पत्र
पूर्व गृह सचिव का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कई अधिकारियों और संबंधित पक्षों को पत्र भी भेजे हैं। उनका आग्रह है कि ट्रस्ट सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करे कि सोने की रामचरितमानस इस समय कहां है, उसका रिकॉर्ड क्या है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इस समय केवल दावे सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं और ट्रस्ट का पक्ष आना बाकी है।
लोगों के बीच बढ़ी चर्चा
सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग ट्रस्ट की प्रतिक्रिया आने का इंतजार करने की बात भी कह रहे हैं।
निष्कर्ष
फिलहाल यह मामला पूर्व गृह सचिव लक्ष्मी नारायण के दावों पर आधारित है। ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक बयान आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों की जानकारी सामने आना आवश्यक है।