मैथिली भाषा का अपमान नहीं सहेगा बिहार – एक करारा जवाब
आजकल कुछ तथाकथित भोजपुरी कलाकार, जिनकी पहचान सिर्फ़ वायरल वीडियो और भड़काऊ गानों तक सीमित है, वे खुद को बड़ा दिखाने के लिए मैथिली जैसी समृद्ध भाषा को छोटा बताने लगे हैं।
ये न सिर्फ़ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि पूरे बिहार की सांस्कृतिक विरासत का अपमान भी है।
विजय बिहारी जैसे लोग जब मैथिली को छोटा बोलते हैं, तो असल में वो अपनी कुंठा और असफलता दिखाते हैं।
क्योंकि सच ये है कि टैलेंट से नहीं, ट्रेंड से चलने वाले लोग ही भाषा को नीचा दिखाते हैं।
🔥 विक्रम मिश्रा का करारा सवाल – बिल्कुल सही
विक्रम मिश्रा ने बिल्कुल सही कहा –
“अगर रोज़ी-रोटी नहीं चल रही है, तो भाषा को दोष मत दो।”
और ये बात सौ फीसदी सही है।
अगर वीडियो मिलियन में जा रहा है,
तो याद रखिए —
👉 सनी लियोन के वीडियो भी मिलियन में जाते हैं,
लेकिन क्या वही कला की पहचान है?
व्यूज़ = सम्मान नहीं होता।
🎭 भोजपुरी को बदनाम किसने किया?
आज कुछ लोग भोजपुरी के नाम पर:
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अश्लीलता परोस रहे हैं
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मां-बहन की भाषा में गाने बना रहे हैं
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सस्ते डबल मीनिंग से व्यूज़ बटोर रहे हैं
और फिर कहते हैं — “भोजपुरी को आगे बढ़ा रहे हैं” ❌
अगर यही विकास है, तो फिर
👉 मैथिली का सादापन और शालीनता लाख गुना बेहतर है।
🎼 मैथिली: भाषा नहीं, संस्कार है
मैथिली वो भाषा है:
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जिसे संविधान ने मान्यता दी
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जिसके साहित्य को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला
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जिसकी फ़िल्मों और कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले
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जो आज भी अपनी मर्यादा नहीं भूलती
जबकि कुछ लोग सिर्फ़ “लॉलीपॉप”, “चोली-घाघरा” से आगे सोच ही नहीं पाए।
🎯 असली सवाल ये है:
अगर भोजपुरी इतनी महान है तो—
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कितने भोजपुरी कलाकार राष्ट्रीय नेता बने?
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कितनी भोजपुरी फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला?
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कितनी भोजपुरी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली?
और हाँ,
अगर भोजपुरी को भाषा बनवाने का इतना ही दम था
तो अब तक क्यों नहीं बन पाई?
🧠 सच्चाई कड़वी है लेकिन जरूरी है
“बेटा कभी बाप नहीं बन सकता।”
मैथिली एक सभ्य, शास्त्रीय और सम्मानित भाषा है।
उसे छोटा दिखाकर कोई बड़ा नहीं बन सकता।
✊ आख़िरी बात
हम भोजपुरी के विरोधी नहीं हैं,
लेकिन मैथिली का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सम्मान दो — सम्मान पाओ।
भाषा को गाली बनाओगे — तो जवाब तो मिलेगा ही।

